अंग्रेजों के ज़माने की बात है.जंगलात महकमा के रेस्ट हाउस में एक अंग्रेज प्रवास कर रहा था. उसका शौक था शिकार करना और करवाना. एक आदिवासी उसका शौक पूरा करने के लिए रोजाना किसी न किसी जंगली जानवर का शिकार करके लाता था. कितने खतरनाक जानवर का शिकार वह आदिवासी करके लाया इस आधार पर अंग्रेज अफसर उस आदिवासी को ईनाम देता था. अंग्रेज अफसर शिकार किये वन्य जीवों की चीरफाड़ करने के पश्चात् उनके सिर को रेस्ट हाउस की दीवारों पर सजा दिया करता था.
एक दिन वह आदिवासी शिकार करके लाया और अंग्रेज अफसर को कहने लगा, 'हुजूर, आज मैंने सबसे खतरनाक जानवर का शिकार किया है. इसके सर को गर्दन सहित कौन सी दीवार के किस हिस्सा में टांगोगे ?'
'पहले यह तो बताओ भई कि शिकार है कहाँ? मैं देखूं तो सही.'
'शिकार यह रहा.' बोरी को खोलकर शिकार बताते हुए आदिवासी ने कहा.
अंग्रेज अफसर शिकार देखते ही चौंका. शिकार के रूप में एक मनुष्य की लाश थी.
'तूने यह क्या गज़ब किया?' अफसर ने पूछा.
'माई बाप, गज़ब मैंने नहीं किया, गज़ब तो इस जानवर ने किया है. इस दरिन्दे ने मेरी बेटी के साथ बलात्कार करने के बाद उसका गला घोंट दिया. किसी जंगली जानवर ने आज तक ऐसा नहीं किया. इस जंगल में इस जैसा खतरनाक जानवर मैंने जीवन में पहले कभी नहीं देखा.

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