आज हीरोपंती देखी, बहुत लोगो ने कहा अच्छी नहीं है,
मैंने सोचा एक बार देख
मैंने सोचा एक बार देख
ली जाए क्या बुराई है,
फिल्म में हीरो -
हीरोइन की एक्टिंग का तो नहीं पता मुझे
लेकिन पूरी फिल्म मुझे विलेन
यानी की लड़की के बाप के कंधो पे टिकी लगी,
लड़की के बाप का रोल प्रकाश राज जी ने
बहुत ही बखूबी निभाया है, पहले भी ऐसे
विषयों पे फिल्म बन चुकी है,
जहा लड़की का बाप विलेन रहता है, मैंने
देखी भी होगी पर याद नहीं या उस समय
इतनी समझ नहीं थी.
लेकिन आज मैंने उस दर्द को महसूस किया,
कि जिस बाप की लड़की घर छोड़ कर भाग
जाए तो उस पर क्या बीतती होगी, फिल्म में
२० दिनों तक लड़की का बाप
अपनी लड़की को इसी आस में
तलाशता फिरता है
कि मेरी बेटी अपनी मर्जी से नहीं भागी,
उसे
वो लड़का भगा के ले गया, लेकिन जब वो उस
लॉज में जाता है जहा उसकी बेटी रुकी थी, उस
कमरे की हालत देख कर उसे समझ आ जाता है
की उसकी बेटी अपनी मर्जी से भागी थी, तब
वो टूट जाता है,
वह हीरो से कहता है कि कैसे
उसने २० साल अपनी बेटियों को अपनी जान से
भी ज्यादा प्यार किया, उन्हें
पढाया लिखाया, हर सुख दिया, और जब एक
दिन उसे उसकी वही बेटी एक बस में दिखती है
तो उस बस के पीछे भागता है पागलो की तरह
और बेटी बस से उतर कर जब ये कहती है कि आप
लोग क्यूँ कुत्तो की तरह पीछे पड़े है तो वो और
भी टूट जाता है.
बेटी और बाप का रिश्ता बहुत ही अलग
होता है, शुरू से देखा जाता है बेटी माँ से
ज्यादा अपनी पापा से अटैच होती है,
जब
स्कुल में कोई बच्चा उसे तंग करता है
तो वो कहती है कि मै अपने पापा से शिकायत
करुँगी, बाप अपनी बेटी को परछाई की तरह
रखते है, उस की हर तरह से सुरक्षा करते है,
लेकिन वही बेटी जब अपने बाप की इज्जत
नहीं करती, उसके प्यार को भूल जाती है
तो उस बाप को बहुत दुःख होता है,
मै ये भी नहीं कह रही की प्यार करना गलत
है, लेकिन आप किसी के साथ भाग कर
शादी करो इसके पहले अपने माँ बाप के बारे में
जरुर सोचो, आप उन्हें बता सकते है,
वो कभी भी आपका बुरा नहीं चाहेंगे, उन्होंने
हमसे ज्यादा दुनिया देखी है,
उन्हें पता है
की हमारा अच्छा क्या है और बुरा क्या है..
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